अंतर कितना बड़ा है?
राष्ट्रीय औसत के मुक़ाबले:
- सड़क घनत्व — झारखंड और बिहार के कई पिछड़े जिले राष्ट्रीय औसत से 30-40% पीछे।
- बिजली उपलब्धता — मीटर लगे हैं, पर औसत बिजली 12-14 घंटे ही मिलती है।
- ब्रॉडबैंड पहुँच — गाँव-स्तर पर 20-30% से कम घरों में स्थिर इंटरनेट।
समस्या की जड़
समस्या आबंटन की नहीं — समस्या निगरानी और स्थानीय जवाबदेही की है। सड़कें मंज़ूर होती हैं, बजट जारी होता है, ठेका जाता है — पर गुणवत्ता और समय-सीमा पर कोई स्थानीय नज़र नहीं।
JNM का चार-सूत्री समाधान
1. सार्वजनिक प्रोजेक्ट डैशबोर्ड
हर जिला अपने सभी चालू बुनियादी ढाँचा प्रोजेक्ट का सार्वजनिक डैशबोर्ड दिखाए — बजट, ठेकेदार, शुरूआत-समाप्ति तिथि, वर्तमान प्रगति। QR कोड पर साइट पर ही उपलब्ध।
2. नागरिक ऑडिटर
प्रत्येक प्रोजेक्ट पर एक स्थानीय नागरिक ऑडिटर (volunteer) — जो मासिक रिपोर्ट दे। JNM का "मेरा जिला, मेरा सवाल" इसी का माध्यम बने।
3. प्रदर्शन-आधारित अगला आबंटन
जिस ज़िले की पिछली परियोजनाएँ समय पर पूरी हुईं, उसे अगले वर्ष प्राथमिकता आबंटन। यह सिद्धांत प्रदर्शन को पुरस्कृत करता है।
4. आख़िरी मील पर ध्यान
मुख्य सड़क बनने से गाँव नहीं जुड़ता — गाँव जुड़ता है लिंक रोड + नाली + पुलिया से। JNM की प्राथमिकता है — आख़िरी 5 किमी।
स्थानीय कैसे जुड़ें?
- अपने जिले की निर्माणाधीन सड़क की फ़ोटो /report पर भेजें।
- JNM volunteer बनकर "जिला ऑडिटर" बनें।
- अपनी पंचायत को कहें — अगली मीटिंग में सूचना का प्रस्ताव रखे।
"बुनियादी ढाँचा वो नहीं जो ज़मीन पर बने — वो जो टिके, और काम आए।"



