आँकड़े क्या कहते हैं?
- भारत में लगभग 10 करोड़ अंतर-राज्यीय प्रवासी मज़दूर
- बिहार से बाहर जाने वाले प्रवासी — हर परिवार में औसतन 1 सदस्य
- 60% प्रवासी मज़दूर का कोई औपचारिक अनुबंध नहीं
- COVID-19 ने दिखाया — व्यवस्था बिल्कुल तैयार नहीं थी
जिले की अर्थव्यवस्था पर असर
सकारात्मक
- Remittance — कई ज़िलों की GDP का 20-30% तक
- गाँव में नया घर, स्कूल फ़ीस, उपभोग
नकारात्मक
- कौशल पलायन — सबसे सक्षम युवा बाहर
- महिलाओं पर बढ़ा हुआ बोझ — खेती + परिवार + बच्चे
- बच्चों की शिक्षा में अंतराल
- गाँव में रोज़गार-मांग की कमी से MSME विकास रुकता है
JNM का प्रस्ताव — "Migrant Dignity Framework"
1. प्रस्थान-पूर्व सूचना
जब कोई युवा बाहर जा रहा हो — पंचायत में एक डिजिटल रजिस्टर। नियोक्ता का नाम, स्थान, अनुबंध की कॉपी।
2. पोर्टेबल लाभ कार्ड
राशन, स्वास्थ्य, बच्चों की मध्याह्न भोजन योजना — सब One Nation One Ration की तरह पोर्टेबल हो।
3. परिवार सहायता डेस्क
हर ब्लॉक में एक डेस्क — जहाँ प्रवासी का परिवार सूचना/मदद ले सके। JNM volunteer यह संचालित करे।
4. मासिक "वापसी मीट"
जब प्रवासी 6 महीने या एक साल बाद लौटें — पंचायत में एक मीट हो। उनके अनुभव से स्थानीय MSME बने।
5. वापस आओ कार्यक्रम
जो प्रवासी स्थानीय MSME शुरू करना चाहें — उसे जिला उद्योग केंद्र से 30 दिनों में लोन। उसका शहर का experience गाँव की पूँजी बने।
आप क्या कर सकते हैं?
- अपने प्रवासी रिश्तेदार का नाम पंचायत रजिस्टर में लिखाएँ।
- /report पर भेजें — यदि कोई प्रवासी कहीं फँसा है।
- JNM volunteer के रूप में अपने ब्लॉक के "Migrant Family Desk" में शामिल हों।
"पलायन रोकना मुश्किल है। पलायन में सम्मान देना मुश्किल नहीं।"



